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सेवा की ऐसे तड़प केवल भारतीय राजनीति में

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जी हाँ, भारत की राजनीति सबसे निराली हैं जहाँ सेवा भाव कूट-कूट कर भरा हुआ हैं, और उसकी तड़प ऐसी की नींद नहीं आये। अगर किसी को टिकट मिल जाता है तो जनता की सेवा की सौगंध खाता हैं और किसी का कट जाता हैं तो पार्टी बदल लेता हैं। पर उसे किसी भी हाल में जनता की सेवा करनी हैं, भले ही कल तक जिस पार्टी को गाली दे रहे थे उसी में जाकर क्यों नहीं टिकट लेना पड़े। यहाँ जनता की सेवा करने की इतनी ललक हैं की 200 सीट के लिए हजारों आवेदन आते हैं सभी में लिखा होता हैं ‘जनसेवा’ वो बात दूसरी है घर में भले ही पानी का लोटा नहीं पकड़ाते हैं पर उन्हें जनता की जबरदस्ती सेवा करनी हैं। यहाँ सेवा करने के लिए झूठी कसमें, मुकदमे, जेल, घोटाले सब करने पड़ते हैं अंतत: कईयों को सेवा का मौका मिल जाता है और कई सेवा नहीं कर पाते हैं।  ईमान-धर्म-जाति सब से झगड़े मोल लेते हुए सेवा मार्ग पर आगे बढ़ते है हमारे राजनेता। कई राजनेता तो इतनी जनसेवा कर लेते हैं की जब छापे पड़ते हैं तो जहाँ भी हाथ डालो नोटों की गड्डियां ही मिलती हैं। भारत की राजनीति के अलावा ऐसी जनसेवा की तड़प आपकों कम ही देखने को मिलेगी। हर गली में आपको जनसेवक मिल जायेगा...

मेरा गाँव, मेरी पहचान.

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मेरे गांव जितना सुंदर कोई गांव न होगा कोई नहीं है इसका मोल कोई भाव न होगा सुघर सलोने बच्चे सारे करते हैं अटखेलियां जहां सुनाते अक्सर बूढ़े, कहानी और पहेलियां ताल तलैया बाग बगीचे, पोखर खेत खलिहान हैं कहीं सुनाता मंत्र और घंटी, और कहीं अजान है शहद से मीठी बोली सबकी, कहीं ऐसा स्वभाव न होगा मेरे गांव जितना सुंदर कोई गांव न होगा मिलना जुलना प्यार से रहना, ही इसकी पहचान है दूर्गापूजा, दंगल, मेला, रामलीला ही शान है कालेज बैंक बाजार है सब कुछ, विकसित गांव है मेरा सभी जातियां रहती हिलमिल, ना तेरा ना मेरा चिड़ियां चहके मधुर राग में, दूसरा  कठिरांव  न होगा मेरे गांव जितना सुंदर कोई गांव न होगा मिलनसार हैं सब नवयुवक, नहीं किसी से बैर है हां, गर देखे कोई बैरी, तो उसकी न कोई खैर है कोर्ट कचहरी थाना पुलिस, ये सब सपने की बातें झगड़ा फसाद सब मिलजुल कर, आपस में ही सुलझाते सदा बने रहें सब ऐसे, फिर कोई टकराव न होगा मेरे गांव जितना सुंदर कोई गांव न होगा शीतल मंद सुगंध पवन बहे, जब चले पुवईया झूम-झम के नाचें गायें, भाभी ननद अंगनईया ग...