सेवा की ऐसे तड़प केवल भारतीय राजनीति में





जी हाँ, भारत की राजनीति सबसे निराली हैं जहाँ सेवा भाव कूट-कूट कर भरा हुआ हैं, और उसकी तड़प ऐसी की नींद नहीं आये। अगर किसी को टिकट मिल जाता है तो जनता की सेवा की सौगंध खाता हैं और किसी का कट जाता हैं तो पार्टी बदल लेता हैं। पर उसे किसी भी हाल में जनता की सेवा करनी हैं, भले ही कल तक जिस पार्टी को गाली दे रहे थे उसी में जाकर क्यों नहीं टिकट लेना पड़े। यहाँ जनता की सेवा करने की इतनी ललक हैं की 200 सीट के लिए हजारों आवेदन आते हैं सभी में लिखा होता हैं ‘जनसेवा’ वो बात दूसरी है घर में भले ही पानी का लोटा नहीं पकड़ाते हैं पर उन्हें जनता की जबरदस्ती सेवा करनी हैं।

यहाँ सेवा करने के लिए झूठी कसमें, मुकदमे, जेल, घोटाले सब करने पड़ते हैं अंतत: कईयों को सेवा का मौका मिल जाता है और कई सेवा नहीं कर पाते हैं।  ईमान-धर्म-जाति सब से झगड़े मोल लेते हुए सेवा मार्ग पर आगे बढ़ते है हमारे राजनेता। कई राजनेता तो इतनी जनसेवा कर लेते हैं की जब छापे पड़ते हैं तो जहाँ भी हाथ डालो नोटों की गड्डियां ही मिलती हैं।

भारत की राजनीति के अलावा ऐसी जनसेवा की तड़प आपकों कम ही देखने को मिलेगी। हर गली में आपको जनसेवक मिल जायेगा। आप सडक से जा रहे हैं आपको रोककर जबरन जनसेवा के किस्से सुनाने वाले जननेता तो आपने देखे ही होंगे। अब तो सेवा करने के ड्रेस कोड और रुतबे भी निराले हैं। वार के हिसाब से ड्रेस, महंगी गाड़ी, केमरे लेकर जनसेवा के निकलने वाले हमारे जनसेवक आपको जगह-जगह मिल जायेंगे। एक किलों केले वितरण में भी दस लोगों के हाथ लगवा कर फोटो डालने वाले जनसेवक इंस्टाग्राम पर थोक के भाव से दिखेंगे।

सालों से उनके जयकारे लगाने वाले कार्यकर्त्ता भले ही खाली हाथ हो पर नेताजी मंचों से जनसेवा की जो हुंकार लगाते हैं उससे तो भगवान इंद्र भी डर जाए। रेडिमेंट हंसी के साथ जो झूठ का डोज देते है वाह वाह क्या ही कहना....आप कितना भी बच लें, कितना भी मना कर दें आपकी सेवा करके ही रहेंगे हमारे राजनेता।



(रामचंद्र यादव )

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